गांगेय डाल्फिन / Gangetic Dolphins

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डालफिन का मह्त्व

नदियो में डाल्फिन का होना पारिस्थितिक संतुलन को कायम रखने के लिए जरूरी है। जिस प्रकार जंगल मे शेर का होना अत्यन्त आवश्यक है, उसी प्रकार नदियों में डालफिन का होना भी आवश्यक है। यह छोटे-छोटे जलीय जीवों को खाकर एक तरह का संतुलन बनाये रखती है। चूकि यह स्वच्छ जल में रहती है, इसलिए यह जल की शुद्धता की सूचक भी है। जैव-विविधता की दृष्टि से भी डालफिन का रह्ना जरूरी है। यह अकारण नही है कि हमारी सरकार ने इसे 'राष्ट्रीय जलीय जीव' घोषित किया है।

डालफिन के लिए खतरे

डालफिन का महत्व स्वयंसिद्ध है, लेकिन आज कतिपय कारणों से इसके अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गये हैं। बहुत अधिक बांधो एवम बैरियर के बनने से डालफिन की गतिशीलता प्रभावित हुई है। उनका विचरण क्षेत्र सीमित हुआ है। मांस एवम तेल के लिए भी डालफिन का शिकार होता रहा है। डालफिन का तेल 'बचवा' और 'घेरूआ' मछलियों को पकडने के लिए प्रयोग किया जाता है। ये मछलिया काफी स्वादिष्ट होती हैं और अच्छे दामों मे बिकती हैं। कभी-कभी मछलियों को पकडने के लिए फेंके गये जाल में फसकर भी डालफिन की मौत हो जाती है। शोध बताते है कि 95 प्रतिशत मौते मानवीय कारणों से होती हैं।

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संरक्षण के सरकारी प्रयास

डालफिन के संरक्षण के लिए सरकार प्रयत्नशील है। विक्रमशिला डालफिन अभयारण्य बिहार के भागलपुर जिले में स्थित है। यह गंगा नदी में सुल्तानगंज से कहलगांव के बीच पचास कि.मी. की दूरी में फैला हुआ है। 05 अकटूबर, 2012 को बिहार मे डालफिन दिवस मनाया गया था। इसी अवसर पर राज्य सरकार ने प्रत्येक वर्ष 5 अक्टूबर को डालफिन दिवस मनाने का निश्चय किया है। निश्चय ही, सरकार के इन प्रयासों से डालफिन के प्रति जागरूकता बढेगी।

  -----------------------------------------------------------संकलन :--बुद्ध प्रकाश ( बि.प्र.से.)
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