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    अररिया का इतिहास

आज से 400 वर्ष पूर्व अररिया का भू- भाग पूर्णिया सूबा का भाग था और यह मुगल साम्राज्य के अधीनस्थ था। शक्तिशाली सूबेदार सैफ खान (1721-1748) ने अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार किया और सुलतानपुर (वर्तमान फारबिसग़ंज) को अपने सूबे में मिला लिया। उस समय पूर्णिया बंगाल प्रांत के तीन सूबों में से एक था। सैफ खान ने महान् मुगल शासक जलालुद्दीन अकबर के नाम पर पूर्णिया और सुलतानपुर के बीच एक किला बनवाया , जिसे "जलालगढ." नाम दिया गया।
सैफ खान ने मुस्लिम कलाकारों , व्यापारिय़ों एवम् योद्धाओं को अपने सूबे मे बसने के लिये प्रोत्साहित किया। उनमे से दो काफी महत्वपूर्ण थे -
(क) मोहम्मद रजा - खगडा (किशनगंज) के नवाब।
(ख) अमीर तक मीर या परवाहा (सुलतानपुर) के मीर साहब।
मीर साहब ने परवाहा के आस-पास के पन्द्रह गावों को खरीद लिया। पलासी की लडाई (1757) एवम् उसमें सिराजुद्दौला की हार ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया। 1765 ई0 की इलाहाबाद की संधि के बाद ईस्ट इंडिया कम्पनी व्यावहारिक रुप से बंग़ाल की स्वामी बन गयी। तत्पश्चात प्रभावी प्रशासन के लिए बंगाल के सूबों को जिला कहा जाने लगा और पूर्णिया बंगाल प्रांत का एक जिला बना जिसकी सीमा दार्ज़िलिंग से लेकर गंगा नदी तक जाती थी।
बदली हुई परिस्थिति में सुलतानपुर एक जमींदारी बन गया, जिसके आधे भाग पर मीर साहब का अधिकार था और आधे भाग पर राजा इन्द्रनारायण राय का। राजा इन्द्रनारायण राय की पत्नी का नाम रानी इन्द्रावती था। रानी का मैका रानीगंज के पास के गांव हंसकोला में था । रानी इन्द्रावती के नाम पर ही आज का रानीगंज जाना जाता है।
राजा इन्द्रनारायण राय की जमीन्दारी 1850 मे मुर्शीदाबाद के प्रताप सिंह को बेच दी गयी। प्रताप सिंह के लिए उतनी दूर से इस क्षेत्र की देखभाल कर पाना कठिन हो रहा था । इसीलिए उन्होंने 1859 में सुलतानपुर् की जमीन्दारी एक अंग़ेज, सर अलेक्जेंडर फोर्बेस को बेच दिया । इसी के साथ विकास के एक नये युग का आरम्भ हुआ । दूसरी तरफ, 1860 के आस पास मीर साहब की मृत्यु हो गयी । उनका कोई उन्तराधिकारी नहीं था । परिणामस्वरुप धीरे-धीरे उनकी जमीन्दारी भी अलेक्जेंडर फोर्बेस की जमीन्दारी में समाहित हो गयी।

अलेक्जेंडर फोर्बेस ने पूरे परगने में नील की खेती शुरु करवायी । जब यूरोप में रासायनिक पद्धति से नील बनने लगा , तब नील की खेती बन्द करवा दी गयी । 1890 मे अलेक्ज़ेन्डर फोर्बेस और उसकी पत्नी डायना की मृत्यु मलेरिया से हो गयी । उसकी मृत्यु तक सुलतानपुर की जमींदारी पूर्णिया जिले की सबसे बड़ी जमीन्दारी बन गयी थी।
आर्थर हेनरी फोर्बेस ने पिता की मृत्यु के बाद शासन संभाला। इसके समय ही सुलतानपुर का नाम बदलकर फारबिसगंज रखा गया। हेनरी फोर्बेस शौकीन और रईस पर क्रूर किस्म का इंसान था। उसके समय मे डुगडुगी पिटवाई गयी कि फारबिसगंज का कोई निवासी रहने के लिए पक्का मकान नही बनवाएगा।
इस वंश का अंतिम वारिस था - मिo मकाई। 1947 के बाद यह परिवार इंग्लैंड चला गया। आजादी के बाद सन 1990 तक वर्तमान अररिया जिला पूर्णिया जिला का हिस्सा बना रहा। 14 जनवरी 1990 को यह एक नये जिले के रूप मे उदित हुआ। तब से यह निरंतर विकास के पथ पर अग़्रसर है।

संकलन:-बुद्ध प्रकाश (बिहार प्रशासनिक सेवा)

source:-
1) Legacy of Heritage - Col. Ajit Dutta
2) कोसी की दग्ध् अंतर कथा - कर्नल अजित दत्त

 

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